Saturday, March 28, 2015
हिंदी सेक्स स्टोरी,लंड के प्यासी औरते
मेरा नाम अशोक (बदला हुआ) है।इस समय मेरी उम्र तीस साल है और मेरे विवाह को करीब ग्यारह साल हो गए हैं।इसमें आपको कोई आश्चर्य नहीं लगता होगा परन्तु अगर मैं आपसे ये कहूँ कि मेरी वास्तव में चार बीवियाँ हैं और समाज को दिखाने के लिए एक तो आप क्या कहोगे?आप शायद सोच रहे होंगे कि मैं मज़ाक कर रहा हूँ या कोई काल्पनिक कथा सुना रहा हूँ।चलिए विस्तार से पूरी कहानी सुनाता हूँ।मेरे परिवार में मेरी माँ, पापा और मैं थे। बड़ी अच्छी ज़िंदगी चल रही थी। एक दिन एक सड़क दुर्घटना ने मुझे अनाथ कर दिया। उस समय मेरी उम्र अठारह साल थी और मैं बारहवीं में था।पापा ने प्रेम विवाह किया था इसलिए वो अकेले रहते थे। उनकी मौत के करीब डेढ़ साल बाद अचानक एक दिन एक फ़ोन आया किसी छोटे से कस्बे से।
कोई आदमी मेरे को वहाँ बुला रहा था और कह रहा था की तेरे दादा सीरियस हैं और घर आ जाओ एक बार। मैं हैरान था कि मेरे दादा कहाँ से आ गये. खैर मैंने उनको हाँ कहा और फ़ोन रख दिया।
फिर मैंने पापा के रिकार्ड्स चेक किये तो पता चला की फ़ोन सही था और मेरे पापा उसी कस्बे से थे। ये जानकार मैंने वहाँ जाने का फैसला कर लिया।
दो दिन के सफर के बाद आखिर मैं वहाँ पहुँच गया। वहाँ पता चला की पापा उनके दूसरे लड़के थे। सारा घर सिर्फ पापा के फोटो से ही सजा हुआ था।
खैर, दादा सीरियस थे, और अपनी अंतिम साँसे गिन रहे थे। बस एक या दो दिन के मेहमान थे। उन्होंने मुझे अपने पास बुलाया और कहा – बेटा, मैं तेरा और तेरे बाप का गुनेहगार हूँ, मुझे माफ़ कर दे।
अब मेरे बाद तुझे इन जिम्मेदारियों को निभाना है।
तेरे सिर तेरी विधवा बुआ रज्जो (उम्र छब्बीस साल), तेरी विधवा चाची रम्भा (उम्र तीस साल), तेरी चचेरी बहन मधु (उम्र अट्ठाइस साल) और तेरी विधवा चचेरी भाभी कामिनी (उम्र इक्कीस साल) ज़िम्मेदारी है।
तू चिंता मत कर मैंने करीब नब्भे लाख रुपये बैंक में डलवा दिए हैं जिनके बारे में इन को नहीं पता, तू बस इनका ख्याल रखना। हाँ, लेकिन रम्भा से बच कर
रहना, वो बड़ी नटखट है।
बाकी कामिनी ठीक है, और बाकी दोनों तो खैर अपना खून है।
मैंने पूछा – लेकिन दादाजी, मैं ये सब कैसे कर पाऊँगा? और फूफाजी, चाचाजी, भैया कैसे …?
बेटा, तेरे माँ बाप और ये सब मेरे कहने पर मिलने वाले थे, लेकिन उस भयंकर दुर्घटना में सब काल का ग्रास बन गए।
तेरे बाप को मनाने और मेरे आखिरी समय में मेरे पास बुलाने के लिए सब वहाँ गए थे और तेरे माँ बाप मान भी गए थे लेकिन भगवान को कुछ और मंज़ूर था।
बेटा, अब तू मधु की शादी करवा देना, कामिनी अभी सिर्फ इक्कीस साल की है और अगर कामिनी को तू अपना सके तो अच्छा होगा नहीं तो उसकी शादी जल्दी करवा देना।
‘हाँ, रज्जो और रम्भा शादी नहीं करेंगी लेकिन वो तेरा ख्याल रख सकती हैं इसलिए उनको अपने साथ रखना..’ दादाजी बोले।
मैंने कामिनी और मधु को एक सेकंड के लिए देखा और दादाजी की बेवकूफी पर दया आई।
कामिनी गेहुंए रंग की औसत कद की औरत थी, उसकी ख़ास बात थी उसके मोटे-मोटे भारी-भारी गोल मटोल चूतड़। उसकी गांड इतनी बड़ी भारी और सेक्सी थी कि उसको देख कर लंड अपने आप खड़ा हो जाता था।
मेरे लंड को जैसे बस उसकी मुलायम गांड का इंतज़ार था। मेरे हाथ उसकी चूतड़ों को सहलाने के लिए बेकरार थे।
और मधु, वो घर में जैसे चलती-फिरती सेक्स बम थी। बिलकुल गोरा रंग और उसपर काली बैकलेस वायर्ड डिप कट मैक्सी पहन कर रखती थी। मैक्सी में से उसके गोरे-गोरे चूचे देख कर मुँह में पानी आ जाता था।
दिल करता था की उसके चूचों को चूस-चूस कर लाल कर दूँ। उसकी पीठ तो सफ़ेद मक्खन जैसी थी जिसको आदमी बस चाटता रहे। उसके खुले गोरे-गोरे कंधे दिल को बेचैन कर रहे थे की बस उसे बाँहों में भर लूँ।
फिर मुझे रज्जो और रम्भा नज़र आईं। दोनों पेटीकोट और स्लीवलेस लो कट ब्लाउज में रहती थी। दोनों के मोटे-मोटे गोरे चूचे, बड़े-बड़े होंठ और सेक्सी कमर देख कर दिल किया की दोनों को नंगी करके पहले तो लंड चुसवाऊँ फिर दोनों को जी लगा कर चोदूँ।
मैंने सोचा चलो ये दोनों सही, फिर शादी तो किसी सेक्सी माल से होगी ही। वो मधु और कामिनी की कमी नहीं खलने देगी।
दादाजी ने कहा – मुझे मालूम है तुम क्या सोच रहे हो? इसमें कुछ गलत नहीं है क्योंकि तुम्हें इनमें सिर्फ औरत ही नज़र आएगी।
पारिवारिक विचार शायद ना भी आये। ये चारों किसी और को घास भी नहीं डालती। सिर्फ कामिनी घर में पूरे कपड़ों में रहती हैं।
कल शाम को तुम्हें आना था इसलिए बाकी तीनों ने साड़ी पहनी थी। वार्ना ये तीनों सिर्फ पेटीकोट और ब्रा में रहती हैं।
रम्भा विधवा होने के सोलहवें दिन से ही मेरा लंड चूस कर काम चला रही है। जब तक वो दिन में दो बार मेरा लंड नहीं चूसती उसको चैन नहीं पड़ता।
मुझे भी उसके चूचे और चूत चाट कर उठने और सोने की आदत हो गयी है। रम्भा और मैं नंगे ही सोते हैं। रज्जो और रम्भा मेरी मालिश अपनी चूचियों से करती हैं। इनकी चूचियों से सरसों के तेल की मालिश के कारण ही मैं ज़िंदा हूँ।
रज्जो मेरा लंड चूसती नहीं परन्तु रम्भा के लंड चूसने के बाद खुद की चुदाई करवाती है। परन्तु दो-तीन दिन में एक बार। मधु और कामिनी अपनी सन्तुष्टी एक-दूसरे से कर लेती हैं।
कल तुम्हारे आने के बाद, जब तुम नहाने गए थे तब रम्भा ने कहा कि मैं और रज्जो अशोक की रखैल भी बन जाएँगी लेकिन किसी और का लंड अब नहीं लेंगी।
बेटा, मैं अब एक या दो दिनों का मेहमान हूँ, मेरी बात मानो रम्भा और रज्जो तुम्हें स्वर्ग का एहसास दिलवा देंगी। हाँ, अगर तुम कामिनी से शादी कर लो तो तुम्हारी पूरी ज़िंदगी ऐश से गुज़रेगी।
कामिनी भले ही मेरे से ना चुदती हो पर उसे बाकी चीज़ों से कोई ऐतराज़ नहीं है। उसी ने कल कहा था कि अगर तुम उससे शादी कर लो तो रज्जो, रम्भा और उसकी ज़िंदगी आराम से कटेगी।
भई, आखिर मेरे पोते का लंड तो तीनों को मिलेगा। और घर की बात घर में सिमट जाएगी। बाद में तीनों के बच्चे हो जायेंगे तो उनमें व्यस्त। तीन चूत और छह चूचे तुम्हारा इंतज़ार कर रहे हैं।
मधु का गोरा रंग मेरे लंड को उबाल रहा है। उसकी गोरी मख्खन जैसी चूचियाँ और पीठ चाटने को मैं बेताब हूँ।
मैं चारों से शादी करने को तैयार हूँ और दुनिया को दिखाने के लिए कामिनी से शादी कर लूँगा। मैंने बेशर्मी से कहा।
जब से माँ और पापा की मौत हुई है कोई नंगी औरत नहीं देखी। वर्ना पापा और मम्मी मेरे सामने ही सेक्स करते थे। माँ जब पापा का लंड चूसती थी तब मेरा लंड भी खड़ा हो जाता था। माँ ऑस्ट्रिया से थी इसलिए उनका गोरा बदन और बड़े चूचे अच्छे लगते थे।
अक्सर मैं उनकी और पापा की मालिश भी करता था उनके सेक्स करने से पहले। माँ के चूचे बहुत बड़े और नरम थे। जिस दिन वो गए थे उस दिन उन दोनों ने आखिरी बार मेरे सामने सेक्स किया था।
उन दोनों ने ऑफिस से आते ही एक दूसरे के कपडे उतारे और माँ ने पापा का दस इंच का लंड मुँह में ले लिया। उनके होंठ लंड के सुपाड़े से लेकर नीचे तक तेज़ी से ऊपर नीचे हो रहे थे। उनकी जीभ लंड पर चक्कर काट रही थी। माँ ने करीब पंद्रह मिनट तक लगातार लंड चूसा।
पापा भी माँ के मुँह को चोदने का आनंद ले रहे थे। फिर माँ ने पापा के निप्पल्स को चूसना शुरू किया और सारे बदन को चाटते हुए उनके होंठ चूसने लगी।
फिर माँ अपनी दोनों टांगें खोल कर खड़ी हो गयीं और पापा को नीचे बैठा कर उनके मुँह को अपनी चूत में लगा दिया। पापा भी मुँह से चुदाई के उस्ताद थे। अपनी जीभ से बीस मिनट में माँ को तीन बार झाड़ दिया और उनका सारा रस पी कर उनके चूचों को चूसने लगे।
फिर माँ को उन्होंने कुतिया बनाया और लंड एक ज़ोरदार झटके के साथ अंदर डाल दिया। पापा की झटकों की रफ़्तार और माँ की सीत्कार ने कमरे का तापमान बढ़ा दिया।
आधे घंटे तक चुदाई के बाद दोनों ज़मीन पर लेट गए। एक घंटे की नींद लेने के बाद पापा नहा कर तैयार हो गए और माँ ने मेरे से तेल मालिश करवाई और तैयार हो गयीं। फिर वो घर से चले गए और ..
दादाजी, ये सब सुनने के बाद कुछ कहते इससे पहले मधु की आवाज़ आई – मेरे, गोरे भैया, कल तुम्हारी हम चारों से शादी है। फिर तुम एक नहीं चार नंगी औरतों के साथ रहना।
और तुम मादरचोद तो नहीं बने लेकिन बहनचोद, बुआ चोद, चाची चोद और भाभी चोद ज़रूर बन जाओगे। और कल से हम तुम्हारी और तुम हमारी मालिश करोगे। सिर्फ आज-आज का इंतज़ार करो।
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